Create an Account

साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभा का यात्रा साहित्य

Journey Of Shri Kankaprabha Of Sadhvi Mukhi (Hindi)

995.00

ISBN: 9788179067734
Categories:
ISBN 9788179067734
Name of Authors Dr. Dharmnarayan Bharadwaj
Name of Authors (Hindi) डॉ. धर्मनारायण भारद्वाज
Edition 1st
Book Type Hard Back

भारतीय संस्कृति की सनातन संत-परम्परा में जैन धर्म की तेरांपथ शाखा के शलाकापुरुष, महँ यायावर, युगप्रधान, अनुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री तुलसी की शिष्या साध्वीप्रमुखा श्री कनकप्रभा जी सम्पूर्ण भारत की यात्राओं में अथ से इति तक सहयात्री बनकर हर पल आचार्यश्री के साथ रही हैं| आचार्यश्री की अनुकम्पा तथा माँ शारदा के आशीर्वाद से उनकी कानपुर से कोलकात्ता की यात्रा को यात्रा ग्रन्थ का स्वरुप देकर मात्र सत्रह वर्ष की अल्पवय में साध्वीप्रमुखा का दायित्व ग्रहण करने से पूर्व कनकप्रभा जी का यह प्रथम सृजन का भावसुमन आचार्यश्री तुलसी के श्री चरणों में समर्पित किया| साध्वीप्रमुखा के पद पर नियुक्ति के बाद अपने व्यस्ततम क्षणों में से समय निकालकर आपश्री ने साहित्य की विविध विधाओं में अपनी लेखनी को निरन्तर सक्रिय रखा तथा यह कार्य आज भी अनवरत अहर्निश जरी है| साहित्य जगत में आप के ग्रंथो की साहित्यकारों के द्वारा यत्र-तत्र-सर्वत्र सकारात्मक विचारों के साथ विशेष चर्चा होती रही है| इसके कारन आम जन का साहित्य के माध्यम से धर्म की पीठिका पर प्रबोधन हुआ है एवं उनकी जीवन शैली तथा जीवन स्तर में सुधार हुआ है| आपका साहित्य के प्रति अगाध स्नेह है| आप वस्तुतः साहित्य की सजग प्रहरी है| आपकी साहित्य साधना श्लाघनीय एवं वंदनिय है| प्राकृत, संस्कृत, हिन्दी, राजस्थानी, गुजराती व अंग्रेजी भाषाओँ की विज्ञ आपश्री ने आगम परम्परा, इतिहास, साहित्यिक शोध, अनुवाद, आलोचना – समालोचना एवं नित नूतन सृजन के माध्यम से अमूल्य साहित्यिक धरोहर का अवदान प्रदान किया है| आपकी लेखनी से काव्य, निबन्ध, जीवनी, उपन्यास, यात्रा-साहित्य आदि की अपरिमित पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है| सम्पादन साहित्य में आपकी प्रतिभा के अपूर्ण दर्शन होते हैं| इन विधाओं के प्रकाशन में आपने शतक पार किया है, जिसमे काव्य, प्रबन्ध – काव्य, गीत – साहित्य तथा प्रवचन पाथेय समाविष्ट है| कई ग्रन्थों की प्रभावी, सटीक तथा विषयानुकूल भूमिका लिखकर आपश्री ने अपने वैदुष्य के चमत्कारी स्वरुप को उजाकर किया है| आपश्री के सम्पूर्ण यात्रा-साहित्य के सन्दर्भ में प्रजापुरुष आचार्य महाप्रज्ञ जी ने लिखा- “साध्वीप्रमुखा कनकप्रभा जी ने यात्रा ग्रंथों में बड़े कौशल के साथ शब्द और अर्थ का सामंजस्य स्थापित किया है| उनकी सधी हुई लेखनी ने ग्रन्थों में सौन्दर्य भरा है| इसमे गुरुदेव की यात्रा के परिपाशर्व में चलने वाले धर्मचक्र का साक्षात्कार किया जा सकता है”|

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Journey Of Shri Kankaprabha Of Sadhvi Mukhi (Hindi)”

Your email address will not be published. Required fields are marked *