मरुधरा के महकते फूलः इस संग्रह में राजस्थान के ख्यात 35 लघुकथाकारों की लगभग 175 लघुकथाएँ संकलित हैं। यहाँ पाठक पूर्णिमा मित्रा जैसी अपेक्षाकृत युवा कथाकार की मौजूदगी पायेंगे तो राजस्थान की लघुकथा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले भगीरथ, मोहन राजेश, डॉ. रामकुमार घोटड़ और प्रबोध कुमार गोविल की प्रतिनिधि लघुकथाओं से भी रूबरू होंगे।
लघुकथा दिखने में जितनी छोटी लगती है लिखने में उतनी ही कठिन है। शब्दों की मितव्ययता, प्रभाव की सघनता, यथार्थ का कलात्मक अंकन, कथा-प्रवाह की रोचकता और समापन बिन्दु की बेधकता इन सभी आयामों में संतुलन बनाए रखना तनी हुई रस्सी पर चलने के तुल्य है। राजस्थान का लघुकथाकार इस संतुलन को साधने में काफी हद तक सफल हुआ है। संग्रह की लगभग सभी लघुकथाएँ शिल्प, विषय-वस्तु, विचार या भाषा की दृष्टि से ध्यान आकर्षित करतीं हैं।

Reviews
There are no reviews yet.