हिन्दी नाट्य साहित्य और रंगमंच अनेक पडावो से गुजर कर उस रूप तक पंहुचा है जिसमे आज हम इसे देकते है| समकालीन हिन्दी नाटक और रंगमंच में जहाँ शिल्पगत और तकनीकी सम्बन्धी प्रयोग लगातार देखे जा रहे है, वही आज का जीवन और समाज उसमे बखूबी अभिव्यक्ति भी पा रहे है| वस्तुतः नाट्य साहित्य में युगीन सत्य को प्रस्तुत करने की गूंजाइशसर्वाधिक रहती है| कही व्यंग्य के रूप में, कही त्रासदी के रूप में, कही इतिहास या मिथक के रूप में और इन्हे प्रतिबिम्बित करने हेतु समकालीन नाटककारों ने लोक नाट्य शैली, नुक्कड़ नाटक शैली, एकपात्रीय शैली आदि का सफल प्रयोग किया है| आज के हिन्दी नाटकों में प्रयोगपक्ष और चिन्तन पक्ष दोनों ही महत्वपूर्ण और प्रांसगिक है|
प्रस्तुत पुस्तक में हिन्दी नाटक एवं रंगमंच से सम्बंद्ध छब्बीस आलेख संकलित है जो नाट्य तत्व से लेकर विभिन्न समकालीन नाटकों एवं नाटककरों पर केन्द्रित है| समकालीन हिन्दी नाटकों के सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकार, सामाजिक यथार्थ और चेतना, नाटक में मानवीय मनोभाव, नारी अस्मिता, गीत-योजना, मध्यवर्गीय जीवन की विडम्बनाए और विसंगतिया आदि अनेक कथ्य बिन्दुओ को समेटे प्रस्तुत आलेख हमारे समक्ष समकालीन नाटक का समूचा परिद्रश्य उपस्थित करते है|
हिन्दी नाट्य साहित्य और रंगमंच
Hindi Theatrical Literature And Theater (Hindi)
₹695.00
Order on WhatsApp| ISBN | 9788179064801 |
|---|---|
| Name of Authors | Neetu Parihar |
| Name of Authors (Hindi) | नीतू परिहार |
| Edition | 1st |
| Book Type | Hard Back |
| Year | 2015 |
| Pages | 146 |
| Language | Hindi |

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