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सामाजिक विचारक एवं विचारधारा एमाइल दुर्खीम

Social Thinkers And Ideology (Emile Durkheim) (Hindi)

995.00

ISBN: 9788179067819
ISBN 9788179067819
Name of Authors Dr. Shyam S. Kumawat
Name of Authors (Hindi) डॉ. श्याम एस. कुमावत
Edition 1st
Book Type Hard Back
Year 2019
Pages 319
Language Hindi
University MLSU
Branch Arts
Stream M.A.

इस पुस्तक में समाजशास्त्र विषय के आधार-स्तम्भ एमाइल दुर्खीम के जीवन एवं चिन्तन की विस्तृत व्याख्या की गई हैं| उनकी प्रमुख रचनाओं के सार- संक्षेप के साथ ही उनके द्वारा विवेचित समाजशास्त्र की वैज्ञानिक व्याख्या, पद्धतिशास्त्र, तुलनात्मक पद्धति, प्रत्यक्षवाद, समाजों का वर्गीकरण, व्यक्ति और समाज के सम्बन्ध, सामाजिक उद्विकास का सिद्धान्त, नैतिकता का सिद्धान्त, मूल्यों का सिद्धान्त, ज्ञान का समाजशास्त्र, प्रकार्यवाद की अवधारणा, शिक्षा का सिद्धान्त एवं साम्यवाद आदि अनेक वैचारिक अवधारणा, ओघोगिक समाजो की समस्याएँ, समाजवाद एवं साम्यवाद आदि अनेक वैचारिक अवधारणाओ पर दुर्खीम की विचार - द्रष्टि का गहन विश्लेषण किया गया है| इसके साथ ही दुर्खीम की चार प्रमुख पुस्तकों में प्रस्तुत उनके सारगर्भित सिद्धान्त यथा: समाज में श्रम विभाजन, सामाजिक तथ्य, आत्महत्या तथा धर्म एवं धार्मिक जीवन के प्रारम्भिक स्वरुप की सूक्ष्म, गहन एवं विस्तृत संख्यिकीय - समाजशास्त्र विवेचना दुर्खीम की मूल पुस्तकों के अध्ययन के आधार पर इस पुस्तक में 6 प्रमुख अध्यायों के अन्तर्गत की गई है|

डॉ. श्याम एस. कुमावत (M.A. स्वर्ण-पदक, मिहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय, उदयपुर, NET, Ph.D. ), वर्तमान में एसोसियेट प्रोफ़ेसर-समाजशास्त्र, राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय, उदयपुर (राज.) के पद पर कार्यरत हैं| आप गत 25 वर्ष से स्नातक-स्नातकोत्तर कक्षाओं के अध्यापन एवं शोध कार्यों से जुड़े हुए हैं| पूर्व में आपकी 4 पुस्तकें, तथा -"उघमी और उघमिता" (2001), "आदिवासी प्राधिकार संरचना" (2017), "सामाजिक विचारक एवं विचारधारा" कार्ल मार्क्स" (2018) तथा "सामाजिक विचारक एवं विचारधारा" मैक्स वेबर" (2019) प्रकाशित हो चुकी हैं| आपके द्वारा अनेक राष्ट्रिय एवं अन्तराष्ट्रियसंगोष्ठियों में शोध - पत्रों का वाचन किया गया हैं तथा गहन क्षेत्रीय अनुसंधानिं पर आधारित अनेक शोध-पत्र रास्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं| आपके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों द्वारा 3 लघु शोध कार्य किये जा चुके है तथा Ph.D. शोध कार्य करवाए जा रहे| वर्तमान में आपकी रूचि समाजशास्त्रिय सैद्धान्तिक चिन्तन, धर्म का समाजशास्त्र, लौकिक संस्कृति तथा लोक देवी-देवताओं के अध्ययन-अनुसंधान में है| आपकी पुस्तक "आदिवासी प्राधिकार संरचना" के लिए आपको राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर में 21-22 दिसम्बर 2017 को 'राजस्थान समज्शाश्ट्री परिषद्' की 24 वीं राष्ट्रिय कान्फरंस में वर्ष 2016-17 का प्रश्थित "औ.पी.शर्मा"युवा समाज विज्ञान पुरस्कार" (O.P. Sharma: Young Social Scientist Award) प्रदान किया गया है|

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