काष्ठ कला की दृष्टि से भी उसने समय-समय पर अपने पूर्वजों से सीखते हुए सदैव कुछ न कुछ नया देने की कोशिश की है। प्राचीन हवेलियों, राजघरानों तथा संग्रहालयों में काष्ठकला निर्मित अनेक ऐसी चीजों देखने को मिलेंगी जिनके लिए यह कहा जा सकता है कि सधैसधाये शिल्पियों द्वारा ऐसी कलाकृतियों का निर्माण किसी ईश्वरीय शक्ति की ही देन कही जानी चाहिये।
चित्रकला की विविध शैलियों तथा प्राचीन गुफाचित्रों, शैलचित्रों के अंकन इस बात के साक्षी हैं कि पहले का मानव भी अपनी कला में अत्यंत दक्ष, कुशाग्र तथा भविष्यद्रष्टा था जिसके कारण सैकड़ों वर्ष पुरानी निर्मिति आज भी हमारे समक्ष उसी नव्य-भव्य रूप में जीवंतता लिए सुरक्षित है।

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