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मेवाड़ की लोक संस्कृति में काष्ठ कला

Mewar ki Lok Sanskriti Me Kashth Kala (Hindi)

1,595.00

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ISBN 9789367097281
Name of Authors Dr. Jayshree Chundawat
Name of Authors (Hindi) डॉ. जयश्री चुण्डावत
Edition 1st
Book Type Hard Back
Year 2026
Pages 260

काष्ठ कला की दृष्टि से भी उसने समय-समय पर अपने पूर्वजों से सीखते हुए सदैव कुछ न कुछ नया देने की कोशिश की है। प्राचीन हवेलियों, राजघरानों तथा संग्रहालयों में काष्ठकला निर्मित अनेक ऐसी चीजों देखने को मिलेंगी जिनके लिए यह कहा जा सकता है कि सधैसधाये शिल्पियों द्वारा ऐसी कलाकृतियों का निर्माण किसी ईश्वरीय शक्ति की ही देन कही जानी चाहिये।

चित्रकला की विविध शैलियों तथा प्राचीन गुफाचित्रों, शैलचित्रों के अंकन इस बात के साक्षी हैं कि पहले का मानव भी अपनी कला में अत्यंत दक्ष, कुशाग्र तथा भविष्यद्रष्टा था जिसके कारण सैकड़ों वर्ष पुरानी निर्मिति आज भी हमारे समक्ष उसी नव्य-भव्य रूप में जीवंतता लिए सुरक्षित है।

नाम : डॉ. जयश्री चुण्डावत

जन्मतिथि : 7 नवम्बर, 1990

शिक्षा : मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के सम्बद्ध भोपाल नोबल्स कन्या महाविद्यालय से सन् 2012 में चित्रकला विषय में एम.ए. में प्रथम स्थान। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर से 2020 में “मेवाड़ की लोक संस्कृति में काष्ठ कला का अनुशीलन “विषय पर पीएच.डी.।

प्रदर्शनी : राजस्थान ललित कला अकादमी, पश्चिमी सांस्कृतिक कला केन्द्र में चित्र प्रदर्शन ।

  • भारतीय कलाओं में चित्रकला के प्रति विशेष अभिरूचि, अध्ययन और लेखन, शोध-साधना, आदि में समय-समय पर रचनात्मक अनुदान तथा राष्ट्रीय कला व इतिहास विषयक संगोष्ठियों में भागीदारी व शोध-पत्रों की प्रस्तुति ।
  • मेवाड़ की काष्ठ कला के शोध अध्ययन पर प्रस्तुत कृति में ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में संस्कृति व चित्रण-उचित्रण का अध्ययन प्रस्तुत किया गया।

सम्प्रति : सहायक आचार्य (VSY), राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय, उदयपुर।

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