डॉ. रणजीत कुमार मीणा उदयपुर जिले की तहसील सराड़ा के ग्राम सिंघटवाड़ा, जावरमाईन्स कस्बे के निवासी है। इनकी शिक्षा विश्वविद्यालय सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के कला संकाय में स्नातक, एम.ए. समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, बी.एड., पीएच. डी. मोहललाल सुखाडिया विश्वविद्यालय, उदयपुर से हुई है। आरण्पीण्एसण्सीण द्वारा आयोजित स्लेट उत्तीर्ण किया है। डॉ. मोणा राजस्थान लोक सेवा आयोग, अजमेर द्वारा चयनित होकर राजस्थान शिक्षा सेवा (महाविद्यालय शाखा), कॉलेज शिक्षा विभाग, जयपुर द्वारा इनकी नियुक्ति 2008 में असिस्टेंट प्रोफेसर (समाजशास्त्र) विषय में हुई है। इनका पदस्थापन राजकीय स्नानकोत्तर महाविद्यालय, नाथद्वारा (राजसमंद), राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, प्रतापगढ़, जिला-प्रतापगढ़, राजकीय महाविद्यालय खेरवाडा (जिला-उदयपुर) में अध्यापन का कार्य किया। आपके विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक शोध पत्र-पत्रिकाओं में लगभग 10 आलेख प्रकाशित हुये है। पिछले 10 वर्षों से समाजशास्त्र में अध्यापन एवं अनुसंधान कार्य में जुड़े हुए है। आदिवासी मामलों के जानकार है। आपके द्वारा लगभग 50 से अधिक अंर्तराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में सहभागिता, तकनीकी सत्र अध्यक्षता एवं पत्रवाचन किया है। डॉ मोणा समाजशास्त्री, शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं आदिवासी लेखक, विचारक एवं सामाजिक कार्यकर्ता है।
डॉ मीणा को ग्लोबल मेनेजमेंट काउन्सिल का नेशनल एजुकेशन एण्ड रिसर्च अवार्ड आदर्श विद्या सरस्वती राष्ट्रीय पुरस्कार, संभाग स्तरीय उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान, श्री मेवाड़ वागड़-मालवा जनजाति समाज संस्थान, उदयपुर द्वारा आदिकवि महर्षि वाल्मीकि गौरव पुरस्कार, माणिक्य लाल वर्षा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर द्वारा जनजाति प्रतिभा सम्मान, अनुसूचित जाति-जनजाति कॉलेज शिक्षक सम्मान, इंडियन एजुकेशन कांग्रेस द्वारा टीचिंग एक्सीलेट अवार्ड एवं अन्य राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। आप राजस्थान समाजशास्त्र परिषद, मूल प्रश्न, सामाजिक बदलाव, अरावली उदघोष, सामाजिक शोध समग्र आदि पत्र-पत्रिकाओं के सदस्य है एवं समता साहित्य अकादमी, उदयपुर के जिलाध्यक्ष है। विभिन्न शोध पत्रिकाओं के सम्पादक एवं सलाहकार मण्डल में भी है।
डॉ. रणजीत कुमार मीणा वर्तमान में एसोसियेट प्रोफेसर, समाजशास्त्र विभाग, राजकीय महाविद्यालय, ऋषभदेव, उदयपुर (राज.) के पद पर सेवारत है। आप विगत 16 वर्षों से स्नातक-स्नातकोतर कक्षाओं के अध्यापन एवं शोध कार्यों से जुड़े हुए है। पूर्व में आपको 2 पुस्तकें “जनजातीय समाज में माँ-बच्चे के स्वास्थ्य से सम्बन्धित योजनाओं का प्रभावः एक समाजशास्त्रीय अध्ययन” (2019), “भारत में जनजातीय मथाज” (2025) प्रकाशित हो चुकी है।

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