‘चिंता एवं अवसादः एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका’ पुस्तक का मुख्य उद्देश्य पाठकों में चिंता एवं मानसिक अवसाद से जुड़े मिथकों को दूर करते हुए इनके लक्षणों, कारणों एव उपचार के संभावित तरीकों की समझ विकसित करना है। हालांकि यह पुस्तक पेशेवर परामर्श एवं उपचार का विकल्प नहीं है, परन्तु इससे अर्जित ज्ञान स्वयं के साथ-साथ अन्य की मानसिक समस्याओं को समझने हेतु भी उपयोगी होगा। मानसिक रोगों को लेकर समाज में कई भ्रान्तियां हैं जिससे कि सही समय पर रोगी को उपचार सुलभ नही हो पाता। कई मामलों में तो रोगी उपचार से वंचित रहता है। उपचार के अभाव में मानसिक रोग की तीव्रता बढ़ती जाती है। सही जानकारी होने से मानसिक समस्याओं से ग्रसित व्यक्ति या उनके परिजन इसे अभिशाप समझ कर छिपाने के बजाय उचित परामर्श एवं चिकित्सा सहायता ले सकेंगे। चिंता एवं मानसिक अवसाद जैसी समस्याओं का उपचार संभव है, आवश्यकता एक सही कदम उठाने की है। पुस्तक का मुख्य उद्देश्य पाठकों को यही जरूरी कदम उठाने हेतु अभिप्रेरित करना है।
आभारः इस पुस्तक का लेखन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (द्वितीय चरण) के तहत संभव हुआ है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में संचालित हुई इस परियोजना हेतु राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान 2.0 का आभार।

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