कला आन्तरिक मनोभावों की सच्ची परिचायिका है| भारतीय ललित कलाओं में मूर्तिकला का विशिष्ट स्थान रहा है| मूर्तिकला द्वारा मनुष्य अपनी भावनाओं तथा विचारों का प्रत्यक्षीकरण करता है| उदयपुर में शैव. वैष्णव, शाम्य और सूर्य मंदिरों तथा देवालयों की प्रमुखता रही है| इन मंदिरों पर उत्कीर्ण मूर्तियाँ तत्कालीन पार्थिव जगत को स्पष्ट करती है| पुरातात्विक द्रष्टि से मूर्तियों का स्थान महत्वपूर्ण है, इसी द्रष्टिकोण से इसे पुस्तक में मैने पार्थिव जगत के हर पहलु को समझने का प्रयास किया है| प्रस्तुत पुस्तक में विष्णु मन्दिर व लक्ष्मीनारायण मन्दिर, आहाड़ तथा गंगोदभव शिवालय, आहाड़ एवं रत्नेश्वर शिवालय, शोभागपुरा के स्थापत्य का विश्लेषण किया है| इन मन्दिरों में उत्कीर्ण मूर्तियों में परिलक्षित धार्मिक प्रवृत्तियां, व्यावसायिक प्रक्रियाएं, वात्सल्य प्रेम की भावनाएँ, सैन्य किवं, शिक्षा-दीक्षा, संगीत-नृत्य और परिधान-आभूषण आदि विशेषताएँ इस पुस्तक की महत्वता है|
उदयपुर की मूर्तिकला में अभिव्यक्त पार्थिव जगत
Earth World Expressed In Sculpture Of Udaipur (Hindi)
₹85.00
Order on WhatsApp| ISBN | 9788179063521 |
|---|---|
| Name of Authors | Dr. Hemendra Choudhary |
| Name of Authors (Hindi) | डॉ. हेमेन्द्र चौधरी |
| Edition | 1st |
| Book Type | Paper Back |
| Year | 2013 |
| Pages | 38 |
| Language | Hindi |

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