भारतीय संस्कृति को उन्नत करने में भीलों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है| भीलों का इतिहास गौरवपूर्ण रहा है| भील भारत के केन्द्र भाग खानदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान तथा सतपुड़ा के बड़े भक्त रहे है| बांसवाडा और डूंगरपुर राजस्थान के वे भाग हैं जहाँ भीलों की ओसतन संख्या अधिक है| ये दोनों क्षेत्र वागड़ के नाम से विख्यात हैं| माही सोम की पावन धाराएं इन्हें सींचती रही है| फागुन में पलाश से यह सुन्दर दिखाई देता है| राजस्थान के पिछडे क्षेत्र होते हुए भी अपनी सांस्कृतिक परम्परा को भीलों ने संजोया है| भीलों का जीवन अनेक धार्मिक आस्ताओं और विश्वासों से जुड़ा हुआ है| भीलों के संस्कार एवं सामाजिक उत्सव पर्व से सम्बन्धित गीतों का संकलन एवं उनका संगेतिक द्रष्टि से विश्लेषण करना, इस पुस्तकक में मेरा मूल ध्येय रहा है| भीलों के नाच उनके पद संचालन की द्रष्टि से ताल मात्र बोल इत्यादि की संरचना इस पुस्तक में देने का प्रयास किया गया है|
भील संगीत और विवेचन
Bhil Music And Thought (Hindi)
₹395.00
Order on WhatsApp| ISBN | 8185167028 |
|---|---|
| Name of Authors | Malini Kale |
| Name of Authors (Hindi) | मालिनी काले |
| Edition | 1st |
| Book Type | Hard Back |
| Year | 1987 |
| Pages | 231 |
| Language | Hindi |
व्याख्याता संगीत राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय छोटी सादड़ी| राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर से भारतीय संगीत में एम.ए.| शाश्त्रीय संगीत, सुगम संगीत एवं नृत्य में रूचि| आकाशवाणी कलाकार| माणिक्य लाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा भीलों के सांस्कृतिक जीवन पर अध्ययन| शिक्षा विभाग राजस्थान द्वारा आयोजित विविध गतिविधियों में विशेष योगदान|

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