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चंडीगढ़ हूँ मै

I Am Chandigarh (Hindi)

225.00

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ISBN 9789393859259
Name of Authors Dr. Mohan Chaudhary
Name of Authors (Hindi) डॉ. मोहन चौधरी
Edition 1st
Book Type Paper Back
Year 2025
Pages 114

आधुनिक सभ्यताओं के विकास में वैज्ञानिक, विज्ञान, तकनीक की भाँति आधुनिक शहरों के विकास में आर्किटेक्चर्स का बहुत बड़ा योगदान रहा है। उत्तर भारत के व्यवस्थित, अनुशासित, नियमबद्ध और सौन्दर्य-निकेत चंडीगढ़ को प्रसिद्ध वास्तुकार ली कारबूजियर ने यूरोप के शहरों के नक्शे कदम पर बसवाया। आधुनिक और अत्याधुनिक तौर-तरीकों में बंधा यह शहर आकर्षण और विकर्षण दोनों का अद्भुत उदाहरण पेश करता है। शिक्षा, चिकित्सा, विकास, नीति-नियम, फेशन, मनोरंजन, व्यवस्था और रोजगार के अवसरों से संयुक्त इस शहर में इन्हीं के बीच कुछ अमानवीय संवेदनाओं की पेशगी मिल जाना भी दुर्लभ न होगा। दो राज्यों की राजधानी का अंत: विलास एवं अंतर्कलह इसे अपने अस्तित्व को निखारने और जन-जन से जुड़े संवेदनामय सरोकारों से रचाते-बसाते हुए भी दिग्भ्रमित करने के लिए पर्याप्त है। चकाचौंध भरी जिंदगी के साथ संघर्षरत जिंदगी की पहचान भी इसे अलगाती है। मेलो-ठेलों एवं उत्सबों में राष्ट्रीयता के अनेक छोटे-मोटे रंग इसे एक छोटे भारतवर्ष की मिसाल बनाती है। सच में, सिटी ब्यूटीफुल’ का तमगा इसके तागे को अनेक सरणियों में पिरोता हुआ ऊर्जस्वित है।

डॉ. मोहन चौधरी

जन्म: कपासन, जिलाः चित्तौडगढ़, राजस्थान

प्रकाशन विवरण

(क) पुस्तके

1. आधुनिक काव्य (ब्याख्या एवं समीक्षा)

2. स्वातंत्र्योत्तर हिन्दी नाटकों में राष्ट्रीय चेतना (शोध प्रबंध)

3 रीतिकाव्य ((व्याख्या एवं समीक्षा)

4. मेवाड़ हूँ मैं (काव्य संग्रह)

(ख) शोध पत्र एवं आलेख

1. सत्तरोत्तरी हिन्दी नाटकों में राष्ट्रीय चेतना

2. मीरा पदावली में विविध साहित्यिक सरणियों का समागम

3. प्रेमचंद की युग सापेक्षता: अद्यतन युवा

4. स्वातंत्र्योत्तर हिंदी नाटकों में राष्ट्रीयता के युगीन सन्दर्भ

5. राष्ट्र, राष्ट्रीयता और द्विवेदीयुगीन काव्य

6. समकालीन काव्य में भारतीय और मानवीय मूल्य-बोध

7. गीतांजलिः आध्यात्मिकरहस्य का दिव्य आलोक

8. आठवांसर्गः परिवेशकी सजगता में भाषाकामणिकांचन संयोग

9. भाषा और राष्ट्रीयता

10. भीष्म साहनी के नाटकों में नारी-अस्मिता

11. वैश्चिक परिदृश्य में बढ़ती हिंदी की ताकत

12. आजादी के आंदोलन में जाट योद्धाओं का अवदान

13. मेवाड़ के लोकगीतों में सनातन देव-संस्कृति का गुणगान

14. प्रगतिवादी आलोचना और शिवकुमार मिश्र की आलोचना-दृष्टि

15. हिन्दी सिनेमा में गीत-संगीत और नृत्य

16. फुले वेचिताः ताल से लता और लता से ताल

17. समतामूलक समाज के निर्माण में डा भीमराव अंबेडकर का योगदान

18. डॉ. दिलीप मेहरा का ‘मकान प्ररा’ण’ जिंदगी का जलता दस्तावेज

19. आत्मिक अनुशासन भरे प्रश्नअकुलताओं के घेरे में कितने महाभारता

20. जीवन में योग की प्रासंगिकता

संप्रति- सहायक आचार्य और विभागाध्यक्ष, स्नातकोत्तर राजकीय कन्या महाविद्याल, सेक्टर-11, चंडीगढ़ में कार्यरत।

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