प्रस्तुत पुस्तक मूल रूप से आदिवासियों की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत को वर्तमान परिवेश में प्रस्तुत करती है। प्रस्तुत पुस्तक में जनजाति समाज से संबंधित आवामों यथा परिवार, विवाह, रिश्तेदारी, धर्म और जादू, जनजातीय आर्थिक राजनीतिक व्यवस्था, संस्कृति पर सहज एवं सरल रूप में प्रकाश डाला गया है। साथ ही अध्ययन के दृष्टिकोण से राजस्थान की प्रमुख जनजातियों को सम्मिलित करते हुए ऐतिहासिक और वर्तमान परिदृश्य में प्रमुख विकास योजनाओं को दर्शाया गया है।
भारत में जनजातीय समाज
Bharat me Janjatiy Samaj (Hindi)
₹495.00
Order on WhatsApp| ISBN | 9789387201255 |
|---|---|
| Name of Authors | Dr. Sanjay Geel |
| Name of Authors (Hindi) | डॉ. संजय गील |
| Edition | 1st |
| Book Type | Paper Back |
| Year | 2024 |
| Pages | 320 |
डॉ. संजय गील
जन्मतिथि- 06, मार्च 1981
शिक्षा – एम.ए. समाजशाख, यू.जी.सी. नेट एवं पीएच.डी.
शैक्षिक अनुभव- राजस्थान राज्य के विविध महाविद्यालयों में विगत 22 वर्षों से समाज शास्त्र और मानवशास्त्र विषय में स्नातकोत्तर स्तर पर अध्यापन कार्य
प्रकाशन – समाज शास्त्र विषय के अंतर्गत संदर्भ एवं पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन
राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओ में 22 से अधिक आलेखों का प्रकाशन
शोधकार्य एवं सेवाएं – यूजीसी एवं राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित जनजातीय परियोजनाओं पर कार्य। स्वयंसेवी संस्थान साई एस्ट्रो विज़न सोसायटी के माध्यम से निर्धन, लावारिस और अनाथ बच्चो के लिए कार्य, जनजातीय महिलाओ और बुजुर्ग समस्या से सम्वन्धित परियोजना ओ पर कार्य।
सम्प्रति- एकेडेमिक डायरेक्टर, एपीसी स्नातकोत्तर महाविद्यालय,
प्रतापगढ़, राजस्थान

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