‘वन का विराट् रूप’ आर.सी.एल. मीणा एवं दीप नारायण पाण्डेय के उस अटल विश्वाश का परिणाम है जिसके आधार पर वे मानव को वन-भक्षक से वन-रक्षक बनाने का सपना, गत दो दशकों से वन सेवा में रहकर समाज की सेवा करते हुये, देखते आये हैं| पुस्तकम में वन का विराट् रूप, वनों की विवशता तथा संकट से निपटने के महत्पूर्ण उपाय सुझाये गए है| वन का विराट् देखने से प्रमाणित होता है की वन देवतुल्य, सर्वव्यापी सजीव, अर्ध अमर, उभयलिंगी, अपरिग्रही, धर्मनिरपेक्ष, ज्ञानदाता, परिस्थिति अनुकूलन, पर्यावरण., मृदा एवं जल संरक्षण, धार्मिक कार्य सम्पदनकर्ता, वैद्यराज, तथा सुगंध का खजाना है| इस पुस्तक के लेखकों ने भारतीय पैराणिक साहित्य में वर्णित घटनाओं की एक नवीन द्रष्टिकोण से समाजशास्त्रीय व्याख्या की है| इससे साझा वन प्रबन्ध के निहित दर्शन को समझने में मदद मिलेगी| पुस्तक में वैकल्पिक वानिकी प्रणाली का सुझाव दिया गया है| आशा की जाती है की इस दिशा में भविष्य में और शोध कार्य होंगे| यह पुस्तक नीति-निर्धारकों, प्रशासकों, समाज शास्त्रियों, वानिकी विशेषज्ञों, जन-सामान्य, समाज सेवको, स्वयं-सेवी संस्थाओं, लेखकों एवं वानिकी के वर्तमान रुझान के जिज्ञासुओं के लिए उपयोगी होगी|
वन का विराट रूप
The great form of the forest (Hindi)
₹595.00
Order on WhatsApp| ISBN | 8186231609 |
|---|---|
| Name of Authors | R.C.L. Meena, Deep Narayan Panday |
| Name of Authors (Hindi) | आर. सी.एल. मीणा, दीप नारायण पाण्डेय |
| Edition | 1st |
| Book Type | Hard Back |
| Year | 1999 |
| Pages | 292 |
| Language | Hindi |
आर.सी.एल. मीणा भारतीय वन सेवा के 1978 बैच के अधिकारी हैं| उन्होंने राजस्थान जैसे विषम जलवायुवीय राज्य के अरावली, विंध्य एवं रेगिस्तानी क्षेत्रों में वन संरक्षण, वन प्रबन्ध एवं वन विकास का उत्कृष्ट कार्य संपन्न करते हुये विशाल अनुभव संजोया है| स्वयं ग्रामीण परिवेश का होने के कारन ग्रामीण समाजशास्त्र की रोचक विधाओं तथा भारतीय दर्शन से उनके घनिष्ठ लगाव ने इस पुस्तक को बहुत रोचक बना दिया है| राजस्थान में वानिकी को श्री मीणा ने अपने नविन आयाम दिये हैं|
दीप नारायणा पाण्डेय भारतीय वन सेवा के 1988 बैच के अधिकारी हैं| उन्हें वर्ष 1994 हेतु भारत में वानिकी का सर्वोच्च सम्मान इंदीरा प्रियदर्शनी वृक्षमित्र पुरस्कार (आई..पी.वी.एम.)प्राप्त है| उनकी अनेक पुस्तकों में हिंदी में लिखित “साझा संसाधन प्रबन्ध;’ भी सम्मिलित है|

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